रहमान मलिक की खास रिपोर्ट
बाइट- सतेन्द्र सिंह नेगी
जमीन खरीद फरोख्त मामले में पैसे के लेन-देन में गड़बड़ झाला करने पर व बैंक खाते में पैसा नहीं होने के बावजूद गलत तरीके से गलत रकम चैक के माध्यम से भुगतान करने के मामले अक्सर देखने सुनने और पढ़ने को मिल जाते हैं। इस तरह का गोरखधंधा पूरे देश में न्यायालयों में ढेरों संख्या में चल रहे हैं कुछ कानूनी लड़ाई में उलझे पड़े हैं तो कुछ में न्यायालयों ने पीड़ितों को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
कुछ ऐसा ही मामला कोटद्वार में देखने को मिला है जहां जिला न्यायालय ने चैक बाउंस मामले में बैंक खाते में पैसे नहीं होने के बावजूद जमीन खरीदने के बाद रजिस्ट्री करवाकर भूमि विक्रेता को 2013 से कोर्ट के चक्कर लगवा दिए और विक्रेता को लुभाने के लिए चैक थमा दिए जो बाउंस हो गए।मामला भूमि विक्रेता सतेन्द्र सिंह नेगी व चंद्र प्रकाश शर्मा के बीच 2013 में सिम्बलचौड़ कोटद्वार में पांच बीघा भूमि के क्रय-विक्रय का था जिसमें चंद्र प्रकाश शर्मा जो कि कोटद्वार के बहुप्रतिष्ठित व्यापारिक प्रतिष्ठान के प्राइड माल के मालिक है तथा कोटद्वार निवासी सतेन्द्र सिंह नेगी के बीच सौदा हुआ। पीड़ित सतेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि उन्होंने 2013 में चंद्र प्रकाश शर्मा को पांच बीघा भूमि बिक्री की थी जिसमें कुछ रकम उनके द्वारा रजिस्ट्री के दौरान भुगतान कर दी थी परन्तु 50 लाख से अधिक भुगतान क्रय की गई भूमि में फ्लैट बनाने के दौरान भुगतान कर देने का वादा किया। वहीं चंद्र प्रकाश शर्मा द्वारा एक फ्लैट उन्हें देने को कहा जिसका भुगतान मूल्य दिए जाने वाले भुगतान में कम कर लिया जाएगा। परन्तु चंद्र प्रकाश शर्मा द्वारा न तो फ्लैट बनवाए न ही भुगतान किया। क्रय की गई भूमि में दो-तीन साल तक कोई फ्लैट तैयार नहीं किया गया केवल कालम खड़े कर दिए। जब सतेन्द्र नेगी ने अपने शेष भुगतान मांगा तो चंद्र प्रकाश शर्मा कई बहाने बनाते हुए टालते रहा। चंद्र प्रकाश शर्मा के बहानों से आजिज आकर उन्होंने चंद्र प्रकाश शर्मा की शिकायत रेरा में कर दी जो कि रियल स्टेट और बिल्डरों पर कानूनी नियंत्रण व धोखाधड़ी पर लगाम लगाने का काम करती है। रेरा द्वारा चंद्र प्रकाश शर्मा को सतेन्द्र नेगी का भुगतान करने को कहा परन्तु चंद्र प्रकाश शर्मा द्वारा सतेन्द्र नेगी को दस दस लाख के पांच गैर कानूनी चैक जो कि पचास लाख के थे थमा दिए व भी आठ नौ महीने बाद की तिथि के। परेशान होकर सतेन्द्र नेगी ने कोर्ट की शरण ली तो चंद्र प्रकाश शर्मा हाई कोर्ट में अपील लगा दिए परन्तु हाई कोर्ट ने मामला जिला कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का मानते हुए पुनः जिला कोर्ट में वापस कर दिया।
जिला कोर्ट पौड़ी गढ़वाल ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए पीड़ित सतेन्द्र सिंह नेगी के पक्ष में 28 फरवरी 2025 को निर्णय देते हुए चंद्र प्रकाश शर्मा को 10 लाख 40 हजार के जुर्माने के साथ एक साल की सजा दे दी।